उद्भावना- 11

 स्वालबार्ड के ध्रुवीय द्वीप समूह के सबसे उत्तरी भाग में स्थित है Longyearbyen। नॉर्वे और उत्तरी ध्रुव के बीच आर्कटिक सागर में स्थित इस भूमि खंड पर 6 महीनों तक सूर्य की एक भी किरण नहीं पड़ती । इसका मतलब वहां 6 महीनों तक अंधेरा ही रहता है, पर यह उसकी खास बात नहीं है।

मेरी नींद अचानक से टूट गई है। एक बुरा सपना था। बचपन में मुझे भूत- प्रेतों के डरावने सपने आते थे और मेरी नींद टूट जाती थी ।अब मुझे वह सपने नहीं आते । पर अब जो ख्वाब मुझे सोने नहीं देते वे मुझे पहले से कहीं ज्यादा भयभीत करते हैं। खैर, जागने के बाद मुझे कुछ समय लगा खुद को विश्वास दिलाने में कि मैंने एक महज़ सपना देखा है।

आंँखों को मलकर मैंने अपने आसपास देखने की कोशिश की, पर मुझे केवल अंधेरा नजर आया । अंधेरे की सबसे खास बात यही होती है कि आपकी आंखें खुली हो या बंद, कोई फर्क नहीं पड़ता।

अपने फोन में मैंने वक्त देखा- 02:34 AM । सुबह होने में अभी काफी समय है। मुझे नींद तो आ रही है पर फिर से कोई सपना देखने का साहस अभी फिलहाल मुझमें नहीं है । मैंने जागे रहने का ही फैसला किया ।फोन की रोशनी मेरी आंखों में चुभ रही है तो मैंने उसे भी किनारे रख दिया । यद्यपि मैं रजाई से ढकी हूंँ, मेरा मन आर्कटिक सागर की काली ,अंधेरी लहरों के समान दम घोटने वाले विचारों के भंवर में फंसा है । यहां बहुत ठंड है।

बहुत देर से मैं लहरों के बीच बार-बार अपनी आंँखों को मसल कर आसपास की थाह पाने की कोशिश कर रही हूँ। पर अंधेरे की खास बात यही है कि आपकी आंखें खुली हो या बंद, कोई फर्क नहीं पड़ता।  बहुत देर से मैं हाथ- पैर मार रही हूँ। अभी मेरा लक्ष्य केवल खुद को डूबने से बचाना है।

अंधेरे समुद्र में फंसे हुए लगता है काफी समय बीत चुका है । अब तक मैं डूबी नहीं हूँ। आश्चर्य है ! मुझे दूर कहीं से एक हल्की सी रोशनी आती दिख रही है ।लहरें भी कुछ शांत हो चली है। अगर मैं थोड़ा दम और लगाऊं तो शायद समुद्र तट पर पहुंच सकती हूं । मैं अपनी पूरी जान लगाकर तैर रही हूं ,मैं डूबना नहीं चाहती। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं हैं ।

लगता है मैं तट पर पहुंच चुकी हूं। उत्तरी ध्रुव के समीप इस टापू पर मुझे कुछ नहीं मिलेगा , सिवाय अंधेरे के । यह जानते हुए भी मैंने आंखें खोली और पाया की थोड़ी दूर पर कुछ घरों में लाइटें जल रही हैं।

आर्कटिक सागर में स्थित Longyearbyen की सबसे खास बात यह नहीं है कि वहां 6 महीने अंधेरा रहता है, बल्कि यह है कि 78 डिग्री अक्षांश पर भी मानव जीवन बसा है।

अंधेरे की सबसे खास बात यह है कि उसका अस्तित्व रोशनी के अभाव पर टिका है।

 भोर होने को है । मेरे कमरे की खिड़की से हल्की रोशनी आ रही है । मुझे भी अब सो जाना चाहिए। जागने से पहले शायद अभी मैं एक सपना और देख सकती हूंँ।

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