Random कविता
बाग-बगीचे,
भँवरे,तितलियाँ
पतझड़ का मौसम
बहार
ढलता सूरज
तारों भरी रात
सर्दियों की धूप
और
पहली बारिश!
तमाम वो चीजें
जो दुनिया को दिलकश हैं
मुझे खुद से ज़रा रूठी लगती है
शायरों और फ़नकारों की हसीन बातें
भी अक्सर झूठी लगती है
क्या खास है इन नज़ारों में
तुम बतलाओगे क्या?
सुनो,
चांद भी उतना खूबसूरत नहीं, ऐसा कह देती हूँ
तुम मुझे अपनी नज़र से दिखलाओगे क्या?

Comments
Post a Comment